राजनांदगांव। जामा मस्जिद के सदर व मुस्लिम समाज के अध्यक्ष हाजी रईस अहमद शकील ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से जानकारी दी कि देशभर में शुक्रवार को चांद की पुष्टि.तस्दीक आधिकारिक घोषणा होने के बाद राजनांदगांव छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश भर में आज ईद मनाई जायेगी।
30 मुक्कमल रोज़े के साथ माह रमजान के मुकद्दस महीने का सफर खत्म हो चला है। ईद का दिन अल्लाह की नेमतों का शुक्र अदा करने और भाईचारे को मजबूत करने का होता है।
रईस अहमद ने कहा रमजान सिर्फ रोजा रखने का ही नाम नहीं है, बल्कि रूह की पाकीजगी, सब्र का इम्तेहान और खिदमते खल्क का महीना है। यह महीना हमें अपने रब से जुड़ने, दिल को साफ करने और समाज के कमजोर तबकों के प्रति जिम्मेदारी निभाने का पैगाम देता है। रमजान शरीफ का असल पैगाम सब्र है। दिनभर की भूख-प्यास इंसान को यह एहसास दिलाती है कि समाज में कितने लोग ऐसे हैं, जो रोजाना इसी हालात से गुजरते हैं, जब मुसलमान तीस दिन के रोजों में खुद भूखा रहता है, तो उसे गरीब और जरूरतमंद लोगों का दर्द समझ में आता है। ये एहसास ही उसे दूसरों की मदद के लिए हौसला अफजाई करता है। इस महीने में जकात, सदका और फितरा (दान) देने की खास हिदायत है, ताकि समाज में माली तवाजुन बना रहे और कोई भी शख्स भूखा न सोये। रमजान रहमत और बरकत का महीना है, इस महीने में की गई इबादतों का सवाब कई गुना बढ़ा दिया जाता है।
हाजी रईस अहमद ने कहा कि रमजान एक ऐसा बा-बरकत महीना हैं, जिसका इंतेजार साल के ग्यारह महीने हर मुसलमान को रहता है। रोजा इंसान के जिस्म का जकात होता हैं, रोजदार इंसान के पूरे शरीर का रोजा होता है, जिसका मकसद ये भी है कि इंसान बुराई से जुड़ा कोई भी काम ना करें, कुल मिलाकर रमजान का मकसद इंसान को बुराइयों के रास्ते से हटाकर अच्छाई के रास्ते पर लाना है, इसका मकसद एक-दूसरे से मोहब्बत, प्रेम, भाईचारा और खुशियां बांटना है। रमजान का मकसद सिर्फ यही नहीं होता कि एक मुसलमान सिर्फ किसी मुसलमान से ही अपने अच्छे अखलाक रखे, बल्कि मुसलमान पर ये भी फर्ज है कि वो किसी और भी मजहब के मानने वालों से भी मोहब्बत, प्रेम, इज्जत, सम्मान, अच्छा अखलाक रखे, ताकि दुनिया के हर इंसान का एक-दूसरे से भाईचारा बना रहे। इस महीने खास कर गरीब मजलूम का ख्याल रखा जाता है। ईद-उल-फितर सामूहिक भाईचारे और एकता का प्रतीक है।
ईद मूल रूप से भाईचारे को बढ़ावा देने वाला त्योहार है। इस त्योहार को सभी आपस में मिल के मनाते है, और खुदा से सुख-शांति और घरों में बरकत के लिए दुआएं मांगते हैं।
मुस्लिम समाज जामा मस्जिद के मीडिया प्रभारी सैय्यद अफजल अली ने कहा की शहरे मुत्तवलियांन ने मिलकर ईदुल-फितर 2026 के लिए मठपारा स्थित ईदगाह में जरुरी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। शनिचर की सुबह 8.30 बजे विशेष नमाज ईदुल फितर की अदा की जाएगी।
सैय्यद अफजल अली ने बताया कि अतराफ (एरिये) के सभी मस्जिदों में पूरे महीने ईबादतों के साथ रौनक रही और मुल्क में अमन चैन की दुआ की गई, सभी मस्जिदों दरगाह कब्रस्तान कमेटी के सदर (अध्यक्ष) ने मुबारकबाद पेश की, जिसमें मुख्य रुप से हाजी हाफिज मोहम्मद हन्नफी मस्जिद गोलबाजार, हाजी अब्दुल रज्जाक बड़गुजर अल अजीज मस्जिद इंदामरा, सैय्यद अली अहमद गुड्डू मोती मस्जिद तुलसीपुर, हाजी अब्दुल वफीद यासिनी गौरी नगर, हाजी मो. वफीद शाहे मदीना मस्जिद शांति नगर, सैय्यद असगर अली हासमी कन्हारपुरी मस्जिद, इरफान शेख प्रभारी सदर जलालबाग दरगाह व मदरसा, जलालुदीन निर्वाण-हाजी तनवीर अहमद प्रभारी सदर कब्रस्तान कमेटी मठपारा, सैय्यद अकरम अली सदर दरगाह सैय्यद अटल शाह वली सभी कमेटी के ओहदेदारों मेंबरान ने ईद पर मुबारकबाद पेश की।
ईद-उल-फितर भाईचारे और सोहार्द का पैगाम : हाजी रईस अहमद शकील
