रायपुर। शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून में हाल ही में किए गए बदलावों के बाद, इस वर्ष छत्तीसगढ़ में सिर्फ 19,495 गरीब बच्चों को ही प्राइवेट स्कूलों में निःशुल्क शिक्षा का अवसर मिलेगा। इस बदलाव को लेकर छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल ने कड़ा विरोध जताया है। उनका कहना है कि बीजेपी सरकार अब गरीब बच्चों को महंगे प्राइवेट स्कूलों में शिक्षा देने से पीछे हट रही है, जिसके चलते आरटीई कानून में गैर-संवैधानिक बदलाव किया गया है।
श्री पॉल ने इस मामले में जनवरी में स्कूल शिक्षा सचिव को दो पत्र लिखकर इस बदलाव को निरस्त करने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि यह बदलाव संविधान के खिलाफ है और गरीब बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन करता है। हालांकि, सरकार ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया और 2026-27 शिक्षा सत्र में केवल 19,495 सीटों पर प्रवेश की घोषणा कर दी।
क्रिष्टोफर पॉल ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार का यह कदम गरीब बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में निःशुल्क शिक्षा से वंचित करने की साजिश है। उन्होंने पुनः एक पत्र भेजते हुए वर्ष 2012 से 2025 तक आरटीई के तहत प्राइवेट स्कूलों में गरीब बच्चों को दिए गए प्रवेश की जानकारी दी है, और बताया है कि इस वर्ष सबसे कम संख्या में बच्चों को प्रवेश दिया जाएगा। उन्होंने सरकार से मांग की है कि आरटीई कानून के तहत गरीब बच्चों को सभी स्कूलों में निःशुल्क प्रवेश दिया जाए।
आरटीई के तहत प्राइवेट स्कूलों में प्रवेशित बच्चों की जानकारी:
2012-13: 25,084 बच्चों को प्रवेश
2013-14: 33,560 बच्चों को प्रवेश
2014-15: 44,117 बच्चों को प्रवेश
2015-16: 25,876 बच्चों को प्रवेश
2016-17: 37,933 बच्चों को प्रवेश
2017-18: 44,935 बच्चों को प्रवेश
2018-19: 40,254 बच्चों को प्रवेश
2019-20: 48,167 बच्चों को प्रवेश
2020-21: 52,680 बच्चों को प्रवेश
2021-22: 40,000 बच्चों को प्रवेश
2022-23: 56,679 बच्चों को प्रवेश
2023-24: 51,599 बच्चों को प्रवेश
2024-25: 50,117 बच्चों को प्रवेश
2025-26: 53,023 बच्चों को प्रवेश
इस बार की स्थिति में सबसे बड़ी गिरावट आई है, और केवल 19,495 बच्चों को ही प्रवेश मिलेगा। इससे साफ है कि पिछले वर्षों के मुकाबले इस बार बहुत कम बच्चों को आरटीई के तहत प्रवेश दिया जाएगा।
क्या बीजेपी सरकार गरीब बच्चों के शिक्षा अधिकारों को कुचलने का प्रयास कर रही है? इस सवाल के जवाब का इंतजार प्रदेशवासियों और पैरेंट्स एसोसिएशन कर रहे हैं।
