छत्तीसगढ़ में RTE विवाद : शिक्षा मंत्री के बयान पर सवाल, विशेषाधिकार हनन की मांग

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रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव द्वारा शिक्षा के अधिकार (RTE) कानून को लेकर दिया गया बयान विवादास्पद हो गया है। अकलतरा विधायक राघवेंद्र कुमार सिंह के सवाल पर मंत्री ने सदन में कहा कि आरटीई के तहत अब केवल कक्षा पहली में प्रवेश दिया जा रहा है और नर्सरी में भर्ती बंद कर दी गई है, क्योंकि यह कानून 6 वर्ष से कम उम्र के बच्चों पर लागू नहीं होता।

अभिभावकों ने जताई आपत्ति
छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल ने मंत्री के बयान को भ्रामक बताया और इसे आरटीई कानून की गलत व्याख्या करार दिया। श्री पॉल ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह को पत्र लिखकर मंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की कार्रवाई की मांग की है।

उन्होंने कहा कि आरटीई कानून की धारा 12(1)(ग) स्पष्ट रूप से कहती है कि यदि कोई निजी स्कूल पूर्व-प्राथमिक (नर्सरी/केजी) कक्षाएं संचालित करता है, तो वहां भी 25% सीटें कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित करना अनिवार्य है।

विवादित बयान पर उठे सवाल
अभिभावक संगठन का कहना है कि एक ओर विभाग स्वयं 5 वर्ष के बच्चों को कक्षा पहली में प्रवेश की अनुमति दे रहा है, वहीं मंत्री 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों पर कानून लागू नहीं होने की बात कह रहे हैं। यह स्थिति स्पष्ट रूप से परस्पर विरोधी है।

नर्सरी स्तर पर प्रवेश रुकने से होगी हानि
पॉल ने चेतावनी दी है कि यदि नर्सरी स्तर पर आरटीई प्रवेश बंद हुआ, तो हजारों गरीब और वंचित वर्ग के बच्चे निजी स्कूलों में प्रारंभिक शिक्षा के अपने कानूनी अधिकार से वंचित रह जाएंगे।

उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से अपील की है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और मंत्री द्वारा दी गई कथित मिथ्या जानकारी पर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।