राजनांदगांव (नांदगांव टाइम्स) जिले के कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने पार्टी के प्राथमिक सदस्यता और अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। अपने त्यागपत्र में उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर उपेक्षा, अपमान और साजिश के आरोप लगाए हैं।

उन्होंने लिखा कि वह 1988 से कांग्रेस से जुड़े हुए थे और पिछले 38 वर्षों से पार्टी के लिए तन, मन और धन से योगदान दे रहे थे। लेकिन हाल ही में पार्टी में उनकी भूमिका सिर्फ संगठनात्मक कार्यों तक सीमित कर दी गई, जिससे वे आहत हैं।उन्होंने अपने पत्र में 2019 में हुए अन्याय और 2024 में हुए अपमान का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने मोहला-मानपुर विधानसभा में कांग्रेस प्रत्याशी को 32,000 मतों से जीत दिलाने, खुज्जी विधानसभा में 7,000 मतों से आगे बढ़ाने और लोकसभा चुनाव में जिले में कांग्रेस को 45,000 मतों से जीत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बावजूद, उन्हें नजरअंदाज किया गया और ‘तेरे-मेरे’ की राजनीति में उनकी टिकट काट दी गई।उन्होंने पार्टी में साजिश रचे जाने का भी आरोप लगाया और कहा कि 2018 से कांग्रेस को कमजोर करने की योजना चल रही है। कई नेता जानबूझकर हारने वाले प्रत्याशियों को टिकट दिला रहे हैं ताकि पार्टी कमजोर हो और नेतृत्व को असफल ठहराया जा सके।उन्होंने यह भी कहा कि जब 15 साल के संघर्ष के बाद 2018 में कांग्रेस सरकार में आई, तो कार्यकर्ताओं को मजबूत करने के बजाय व्यक्तिगत स्वार्थ हावी हो गया। इसी का नतीजा रहा कि 2023 में कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई और अब फिर से वही गलतियां दोहराई जा रही हैं।अंत में उन्होंने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का आभार व्यक्त करते हुए अपना त्यागपत्र सौंपा और पार्टी से नाता तोड़ने की घोषणा की।राजनीतिक गलियारों में हलचल
उनके इस्तीफे के बाद जिले में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। अब देखना होगा कि वे आगे किस पार्टी या संगठन से जुड़ते हैं और उनके इस फैसले का स्थानीय राजनीति पर क्या असर पड़ता है।