गंडई पंडरिया। छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव “रंग परब” में दूध मोगरा गंडई के लोक कलाकारों ने अपनी नाट्य प्रस्तुति “अक्कल बड़े के भइंस” से दर्शकों का दिल जीत लिया। यह आयोजन 29 से 31 अगस्त तक रायपुर के मुक्ताकाशी मंच पर हुआ।
मुख्य अतिथि शशांक शर्मा, अध्यक्ष साहित्य अकादमी छत्तीसगढ़, एवं अध्यक्षता उमेश मिश्रा, उपसंचालक संस्कृति विभाग ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई। इस कार्यक्रम के दौरान एक सुखद संयोग देखने को मिला जब छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना के 25 वर्ष और दूध मोगरा गंडई के 49 वर्ष पूरे होने की खुशी में यह आयोजन किया गया।
लोकनाट्य “अक्कल बड़े के भइंस” छत्तीसगढ़ की लोक कला, संस्कृति और देवारी पर्व पर आधारित एक पारिवारिक नाटक है। इस नाटक का अब तक 1200 से अधिक प्रदर्शन छत्तीसगढ़ और देश के विभिन्न हिस्सों में हो चुका है। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटका, उड़ीसा, गुजरात, झारखंड, उत्तर प्रदेश सहित कई राज्य इस नाटक का हिस्सा बने हैं।
दूध मोगरा गंडई के लोक कलाकारों ने अपनी कला की अनूठी प्रस्तुति दी। गौतम जैन, द्वारिका यादव, जीवनलाल गंधर्व, हीरालाल साहू जैसे वरिष्ठ कलाकारों के साथ-साथ तीसरी-चौथी पीढ़ी के कलाकार भी मंच पर थे। इस समूह ने छत्तीसगढ़ की लोककला और संस्कृति को राष्ट्रीय मंचों पर प्रतिष्ठित किया है।
इस आयोजन में दूध मोगरा गंडई के कलाकारों ने यह साबित कर दिया कि छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति का सामर्थ्य अब हर कोने में महसूस किया जा सकता है। आगामी 15 अगस्त 2026 में दूध मोगरा गंडई अपनी रजत जयंती धूमधाम से मनाने की योजना बना रहा है, जिसमें एक वृहद स्मारिका का प्रकाशन भी किया जाएगा।
दूध मोगरा गंडई का यह 49 साल का सफर न केवल छत्तीसगढ़ की लोक कला का जीवंत उदाहरण है, बल्कि यह देशभर में छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर को फैलाने का माध्यम बन चुका है।