धुन के पक्के प्रदीप ने अपनी जिद से बदल दी तकदीर, सूक्ष्म खाद्य उद्योग से कमाई 4 लाख रूपए

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राजनांदगांव। धुन और जिद से सफलता पाने वालों की मिसाल मिलती है वैशाली नगर के श्री प्रदीप कुमार रामराव देशपांडे में। उन्होंने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना का लाभ उठाकर लघु वनोपज पर आधारित उद्योग स्थापित किया, जिससे न केवल आर्थिक मजबूती मिली बल्कि स्वसहायता समूह की महिलाओं को रोजगार भी मिला।

योजना से मिला 2.13 लाख का अनुदान
प्रदीप ने बताया कि उद्योग के लिए कुल 5.50 लाख रुपए का ऋण प्राप्त हुआ, जिसमें से 2.13 लाख रुपए प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के तहत अनुदान के रूप में मिले। इस राशि से उन्होंने आईटीआई बॉम्बे से चिरौंजी डिकॉल्डीकेटर और हर्रा-बहेड़ा डिकॉल्डीकेटर मशीन खरीदी।

मशीनों से बन रहे उत्पाद, सालाना 4 लाख की आय
उनके उद्योग में चिरौंजी का छिलका अलग किया जाता है, छिलके से चारकोल बनता है और चिरौंजी का तेल भी निकाला जा रहा है। साथ ही, हर्रा और बहेरा की छाल निकालने तथा गिरी से तेल निकालने का कार्य भी किया जा रहा है। इन उत्पादों की बाजार में अच्छी मांग है, जिससे सालाना लगभग 4 लाख रुपए की आय हो रही है।

सोलर प्लांट से चलता उद्योग
प्रदीप ने अपने यूनिट में सोलर प्लांट लगाया है, जिससे बिजली का बिल शून्य हो जाता है। इस नवीन तकनीक से वनीय क्षेत्रों में काम करना आसान हुआ है और लघु वनोपज के संरक्षण एवं संग्रहण में भी मदद मिल रही है।

महिलाओं को मिली आजीविका
कौरिनभाठा में संस्कारधानी महिला कृषक अभिरूचि स्वसहायता समूह की महिलाओं को उद्योग में रोजगार मिल रहा है। इससे वे आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के प्रति जागरूकता बढ़ रही है।

योजना से बढ़ा स्वरोजगार
प्रदीप ने बताया कि वे छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, झारखंड और ओडिशा में भी उद्योग संबंधी कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना स्वरोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में कारगर है। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का धन्यवाद किया।