शिक्षा को सेवा के रूप में नहीं, बल्कि एक वसूली के रूप में देख रही है भाजपा सरकार : अब्दुल कलाम खान

Share This :

राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) द्वारा 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा शुल्क में की गई भारी बढ़ोतरी को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस के राष्ट्रीय कोआर्डिनेटर और अल्पसंख्यक विभाग के राजस्थान &ओडिशा प्रदेश प्रभारी अब्दुल कलाम खान ने इस बढ़ोतरी को “छात्र-विरोधी” करार दिया और कहा कि भाजपा सरकार शिक्षा को सेवा के रूप में नहीं, बल्कि एक वसूली के रूप में देख रही है।

कांग्रेस नेता ने कहा, “पांच साल बाद एक साथ परीक्षा शुल्क, आवेदन शुल्क, स्वाध्यायी छात्रों के पंजीयन और अनुमति शुल्क सहित करीब 22 मदों में बढ़ोतरी की गई है। पहले जहां बोर्ड परीक्षा, अंकसूची और प्रायोगिक शुल्क मिलाकर 460 रुपये लिए जाते थे, अब इसे बढ़ाकर 800 रुपये कर दिया गया है। आवेदन शुल्क 80 रुपये से बढ़ाकर 150 रुपये कर दिया गया है।”

अब्दुल कलाम खान ने इस बढ़ोतरी को प्रदेश के किसानों, मजदूरों और मध्यम वर्ग के लिए एक बड़ा वित्तीय बोझ बताते हुए कहा, “यह बढ़ोतरी ऐसे समय में की गई है जब प्रदेश का किसान, मजदूर और मध्यम वर्ग पहले से महंगाई की मार झेल रहा है।”

उन्होंने शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव पर निशाना साधते हुए कहा, “मंत्री जी को छात्रों और उनके अभिभावकों की समस्याएं नजर नहीं आ रही हैं, या फिर वे जानबूझकर शिक्षा को केवल अमीरों तक सीमित करना चाहते हैं।”

स्वाध्यायी छात्रों के पंजीयन शुल्क में भी बढ़ोतरी का जिक्र करते हुए कांग्रेस नेता ने कहा, “स्वाध्यायी छात्रों के पंजीयन शुल्क को 560 रुपये से बढ़ाकर 800 रुपये और राज्य से बाहर के छात्रों के लिए इसे 1540 रुपये से बढ़ाकर 2000 रुपये कर दिया गया है। यह दर्शाता है कि शिक्षा मंत्री पूरी तरह असंवेदनशील हो गए हैं।”

अब्दुल कलाम खान ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि वह मंचों से “बेटा-बेटी पढ़ाओ” और “नई शिक्षा नीति” के नारे तो लगाती है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि परीक्षा शुल्क बढ़ाकर हजारों गरीब छात्रों को पढ़ाई छोड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है। “यह फैसला सीधे-सीधे ग्रामीण अंचल, किसान परिवारों और मजदूर वर्ग के बच्चों के सपनों पर हमला है।”

कांग्रेस नेता ने सरकार से मांग की कि माशिमं द्वारा बढ़ाए गए सभी शुल्कों को तत्काल वापस लिया जाए और 2021 से पहले की दरों को ही लागू किया जाए, ताकि विद्यार्थियों के परिवारों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।