संघ प्रमुख मोहन भागवत बोले—संघ कहे तो पद छोड़ने को तैयार, नेतृत्व चयन में नहीं होता चुनाव

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आरएसएस में न चुनाव और न ही उत्तराधिकारी की होड़

नई दिल्ली (नांदगांव टाइम्स) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने संगठन के नेतृत्व, आयु-सीमा, सामाजिक प्रतिनिधित्व और भ्रष्टाचार जैसे अहम मुद्दों पर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि RSS में सरसंघचालक पद के लिए कोई चुनावी प्रक्रिया नहीं होती और यदि संघ उनसे पद छोड़ने को कहता है, तो वे इसके लिए पूरी तरह तैयार हैं।

भागवत ने स्पष्ट किया कि सरसंघचालक का चयन क्षेत्रीय और प्रांतीय स्तर के प्रमुखों द्वारा किया जाता है। उन्होंने कहा कि सामान्य धारणा यह है कि 75 वर्ष की आयु के बाद व्यक्ति को किसी पद पर नहीं रहना चाहिए, बल्कि बिना पद के संगठन के लिए कार्य करना चाहिए।

संघ पर ब्राह्मण-प्रधान होने के आरोपों को लेकर उन्होंने कहा कि संगठन की शुरुआत ब्राह्मण-बहुल समाज में हुई थी, जिसके कारण प्रारंभिक दौर में इसके अधिकांश संस्थापक ब्राह्मण थे। हालांकि समय के साथ संघ का विस्तार सभी वर्गों और समुदायों तक हुआ है और आज शीर्ष नेतृत्व में अधिकांश समुदायों का प्रतिनिधित्व मौजूद है।नेतृत्व चयन की प्रक्रिया पर बोलते हुए भागवत ने कहा कि “सबसे योग्य उपलब्ध व्यक्ति” को जिम्मेदारी दी जाती है।

उन्होंने बताया कि उनके चयन के समय कई योग्य लोग मौजूद थे, लेकिन वे उपलब्ध नहीं थे, जबकि वे अन्य दायित्वों से मुक्त होकर यह जिम्मेदारी निभा सकते थे।संघ की भूमिका पर उन्होंने कहा कि RSS का कार्य चुनावी राजनीति करना नहीं, बल्कि समाज में संस्कारों का निर्माण करना है। संगठन का लक्ष्य है कि जहां 10,000 की आबादी हो, वहां संघ का कार्य पहुंचे, जिससे भौगोलिक विस्तार के साथ सभी वर्ग स्वतः जुड़ते जाएं।

भ्रष्टाचार पर कड़ा रुख अपनाते हुए मोहन भागवत ने कहा कि संघ सख्त कानूनों और प्रभावी विधायी प्रावधानों के पक्ष में है। उन्होंने बताया कि स्वयंसेवकों को भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वालों का समर्थन करने का निर्देश दिया जाता है और संघ भ्रष्ट लोगों के खिलाफ किसी भी सख्त कार्रवाई का समर्थन करेगा।