आचार्य विद्यासागर महाराज के द्वितीय समाधि स्मृति दिवस पर जैन मंदिर में आचार्य छत्तीसी विधान, वृद्धाश्रम में फल वितरण

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राजनांदगांव। आचार्य विद्यासागर महाराज के द्वितीय समाधि स्मृति दिवस पर बुधवार को शहर के जैन मंदिर में विविध धार्मिक अनुष्ठान श्रद्धा और भक्ति भाव से संपन्न हुए। इस अवसर पर दिगंबर जैन समाज द्वारा आचार्य छत्तीसी विधान का आयोजन किया गया तथा वृद्धाश्रम में फल वितरण कर सेवा कार्य किया गया।
दिगंबर जैन पंचायत के सचिव सूर्यकांत जैन ने बताया कि प्रातः 7 बजे मूलनायक भगवान 1008 नेमिनाथ का अभिषेक एवं शांतिधारा संपन्न हुई। यह अनुष्ठान आर्यिका श्रेष्ठ 105 सिद्धांत मति माताजी, विनीत पति माताजी एवं विनय मति माताजी के सानिध्य में संपन्न कराया गया। इसके पश्चात आचार्य श्री की पूजा एवं आचार्य छत्तीसी विधान माताजी के ससंघ सान्निध्य में संपन्न हुआ।
मौके पर पूज्य सिद्धांत मति माताजी एवं विनय मति माताजी ने मंगल देशना देते हुए गुरु महिमा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि संसार में गुरु से बढ़कर कोई नहीं होता और जिनके जीवन में गुरु नहीं, उनका जीवन अभी प्रारंभ ही नहीं हुआ। माताजी ने आचार्य श्री के विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक प्रकल्पों का उल्लेख करते हुए शिक्षा के क्षेत्र में प्रतिभास्थलीए दया भाव के क्षेत्र में गौशालाएं, चिकित्सा क्षेत्र में पूर्णायु मेडिकल कॉलेज तथा रोजगार के लिए हथकरघा जैसे संस्थानों की प्रेरणा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आचार्य श्री ने अहिंसक जीवन शैली का संदेश केवल जैन समाज को ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व को दिया।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि आचार्य श्री ने जिन शासन की ध्वजा अपने प्रथम शिष्य नवाचार्य 108 समय सागर जी महाराज को सौंपकर नई दिशा प्रदान की है और उनके मार्गदर्शन में अनेक भव्य आत्माएं मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर होंगी।
आचार्य श्री की पूजा के दौरान श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। कार्यक्रम के पश्चात दिगंबर जैन पंचायत एवं आदर्श महिला मंडल द्वारा वृद्धाश्रम पहुंचकर फल वितरण किया गया तथा आचार्य श्री के जीवन पर संस्मरण साझा किए गए।
इस अवसर पर प्रकाशचंद जैन (पप्पू भैया), अनिल बड़कुल, अखिलेश जैन, रविकांत जैन, निखिल जैन, सुधीर जैन सहित आदर्श महिला मंडल की रूपाली जैन, सुनीता जैन, कविता जैन, सारिका जैन, शालिनी जैन, मीना जैन, वंदना जैन एवं बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे।