छत्तीसगढ़ में पहली बार राज्य स्तरीय विश्व पशु चिकित्सा दिवस का भव्य आयोजन, अम्बिकापुर बना साक्षी : पशु चिकित्सकों को मिला सम्मान, “भोजन एवं स्वास्थ्य के संरक्षक” बताए गए

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अम्बिकापुर। छत्तीसगढ़ राज्य के इतिहास में पहली बार विश्व पशु चिकित्सा दिवस का राज्य स्तरीय आयोजन राजमोहिनी देवी कृषि महाविद्यालय, अजिरमा अम्बिकापुर के सभागार में अभूतपूर्व उत्साह एवं गरिमा के साथ सम्पन्न हुआ। पशुधन विकास विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम ने प्रदेशभर के पशु चिकित्सकों, पैरा वेट एवं पशुपालकों को एक मंच पर लाकर “वन हेल्थ” की अवधारणा को साकार किया।

मुख्य अतिथि पर्यटन, संस्कृति एवं धार्मिक न्यास मंत्री राजेश अग्रवाल ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि “पशु चिकित्सक केवल जानवरों का इलाज नहीं करते, बल्कि मानव स्वास्थ्य की प्रथम रक्षा पंक्ति हैं।” उन्होंने विश्व पशु चिकित्सा दिवस के चार प्रमुख उद्देश्यों पर जोर दिया – पशुओं के स्वास्थ्य और भलाई को बढ़ावा देना, पशु चिकित्सकों के कार्यों की सार्वजनिक सराहना, समाज में पशु संरक्षण के प्रति जागरूकता और पशु चिकित्सा विज्ञान में हो रहे नवीन शोध व नवाचारों को प्रोत्साहन।

कृषि, पशुधन विकास एवं मत्स्य पालन मंत्री रामविचार नेताम ने राजधानी रायपुर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभा को सम्बोधित किया। उन्होंने इस वर्ष 2026 की थीम “पशु चिकित्सक : भोजन एवं स्वास्थ्य के संरक्षक” पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि दूध, अंडा, मांस जैसे पशु उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा की जिम्मेदारी पशु चिकित्सकों के कंधों पर है। “एक स्वस्थ पशु ही सुरक्षित खाद्य श्रृंखला की गारंटी देता है”, उन्होंने जोड़ा। मंत्री ने प्रदेश के समस्त पशु चिकित्सकों को बधाई देते हुए विभागीय योजनाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाने का आह्वान किया।

लुण्ड्रा विधायक प्रबोध मिंज ने पशु चिकित्सा के सामाजिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि पशुओं का स्वास्थ्य सीधे तौर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कुपोषण उन्मूलन और खाद्य सुरक्षा से जुड़ा है। उन्होंने “स्वस्थ पशु, स्वस्थ समाज” के नारे को दोहराया।

पशुधन विकास विभाग के संचालक आई.ए.एस. चन्द्रकांत वर्मा ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि विश्व पशु चिकित्सा दिवस का मूल उद्देश्य पशु स्वास्थ्य देखभाल को जनांदोलन बनाना और पशु क्रूरता के विरुद्ध सामाजिक चेतना जागृत करना है। उन्होंने 2026 की थीम के तीनों आयामों – पशु स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा और आम जनता के स्वास्थ्य – में पशु चिकित्सकों की भूमिका को निर्णायक बताया।

पशु चिकित्सकों का सम्मान : कार्यक्रम के सबसे भावुक क्षण में छ.ग. राज्य पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ संघ द्वारा प्रदेश में उत्कृष्ट सेवाएं देने वाले पशु चिकित्सकों को उत्कृष्टता प्रमाण पत्र एवं तीन दशक से अधिक सेवा दे चुके वरिष्ठ चिकित्सकों को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। सम्मान पाकर चिकित्सकों की आंखें नम हो गईं।

संघ के प्रांताध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार पटेल ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में कहा कि “यह दिवस हमें पशुओं के प्रति करुणा और जिम्मेदारी का बोध कराता है। यह हमें याद दिलाता है कि पशुओं का स्वास्थ्य अंततः मनुष्यों के स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है। विश्व पशु चिकित्सा दिवस केवल सम्मान का दिन नहीं, बल्कि आत्ममंथन का दिन है।”

पुस्तिका विमोचन : समारोह में पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ संघ द्वारा प्रकाशित “पशुधन बटवार – स्वच्छ अऊ सुरक्षित पशु उत्पाद बर पशु चिकित्सा के महती उदिम” पुस्तिका का विमोचन माननीय अतिथियों के करकमलों से किया गया। यह पुस्तिका छत्तीसगढ़ी भाषा में है और पशुपालकों को जैव सुरक्षा व गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के गुर सिखाएगी।

विशिष्ट उपस्थिति : मंच पर महापौर मंजुषा भगत, हस्त शिल्प विकास बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष अनिल सिंह मेजर, जिला पंचायत कृषि स्थायी समिति अध्यक्ष दिव्या सिंह सिसोदिया, कृषि मंत्री प्रतिनिधि रविन्द्र तिवारी, सीतापुर विधायक प्रतिनिधि राममणी पैंकरा, पार्षद श्वेता गुप्ता, शरद चन्द्र खरे, कुनाल सिंग सहित सरगुजा संभाग के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

प्रदेशभर से जुटे चिकित्सक : इस ऐतिहासिक आयोजन को सफल बनाने में सरगुजा संभाग के पशु चिकित्सकों के साथ-साथ डॉ.हितेन्द्र कुमार सोनी, डॉ.मोहन शेन्डे, डॉ.के.के.वर्मा, डॉ.अभिषेक मिश्रा एवं प्रदेश के कोने-कोने से आए सैकड़ों पशु चिकित्सक, पैरा वेट स्टाफ एवं प्रगतिशील पशुपालकों की महती भूमिका रही। सभागार में उपस्थित हर चेहरे पर गर्व का भाव स्पष्ट दिख रहा था।