वीबी-जीरामजी योजना से बदली ग्रामीण महिलाओं की जिंदगी, बढ़ी आय और मिला आर्थिक संबल

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राजनांदगांव। विकसित भारत-जीरामजी (वीबी-जीरामजी) योजना ग्रामीण श्रमिकों के लिए रोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत माध्यम बनकर उभर रही है। योजना के तहत रोजगार अवधि 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन तथा दैनिक मजदूरी 261 रुपये से बढ़ाकर 300 रुपये किए जाने से ग्रामीण परिवारों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जिले के ग्राम फरहद की कई महिलाओं ने योजना से अपने जीवन में आए सकारात्मक बदलाव साझा किए।
ग्राम फरहद की नीता साहू ने बताया कि पहले उन्हें रोजगार गारंटी योजना के तहत 100 दिनों तक काम मिलता था, लेकिन अब वीबी-जीरामजी योजना के अंतर्गत 125 दिनों तक रोजगार उपलब्ध हो रहा है। मजदूरी बढ़ने से परिवार के दैनिक खर्चों के साथ बच्चों की पढ़ाई और अन्य जरूरतों को पूरा करने में आसानी हो रही है। उन्होंने इसके लिए केंद्र और राज्य शासन के प्रति आभार व्यक्त किया।
इसी तरह शशिलता यादव ने कहा कि रोजगार अवधि बढ़ने और मजदूरी दर में वृद्धि से ग्रामीण श्रमिकों की आय में बढ़ोतरी हुई है। अतिरिक्त आय से घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति बेहतर ढंग से हो रही हैए जिससे श्रमिक परिवारों में खुशी का माहौल है।
वहीं यामिनी साहू ने बताया कि योजना से परिवार की आर्थिक स्थिति पहले की तुलना में अधिक मजबूत हुई है। बढ़ी हुई मजदूरी और अतिरिक्त रोजगार के कारण घरेलू खर्चों का बेहतर प्रबंधन हो रहा है तथा आर्थिक सुरक्षा का एहसास बढ़ा है। उन्होंने भी इस जनहितकारी पहल के लिए केंद्र और राज्य शासन का आभार जताया।
ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि वीबी-जीरामजी योजना केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने, जीवन स्तर सुधारने और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।