राजनांदगांव। मौसम में एलनीनो के प्रभाव और मानसून में हो रहे बदलाव को देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र राजनांदगांव ने किसानों के लिए विशेष वैज्ञानिक सलाह जारी की है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि खेतों में पर्याप्त पानी उपलब्ध होने पर मचाई (कदो) कर रोपाई करें। यदि नर्सरी उपलब्ध न हो, तो लेही विधि से अंकुरित बीजों को ड्रम सीडर या छिटकवा पद्धति से सीधे खेतों में बोएं। इसके साथ ही बीजों को कवकनाशी और जैव उर्वरकों से उपचारित करना अनिवार्य बताया गया है।
12 अगस्त ‘हरेली’ तक पूरी कर लें बुवाई-रोपाई
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, इस वर्ष आषाढ़ माह 1 जुलाई से शुरू हुआ है। आषाढ़ से लेकर सावन मास की हरियाली अमावस्या यानी ‘हरेली तिहार’ (12 अगस्त) तक खरीफ फसलों की बुवाई व रोपाई की जा सकती है।
सीधी बुवाई: बतर की स्थिति में 15 जुलाई तक बुवाई का परामर्श था।
रोपाई व बियासी: सामान्यतः 30 जुलाई तक यह कार्य पूरा कर लें।
असामान्य परिस्थितियों में यदि किसान हरेली (12 अगस्त) तक भी बुवाई-रोपाई का कार्य संपन्न कर लेते हैं, तो फसल उत्पादन में विशेष नुकसान नहीं होगा।
कम समय में पकने वाली किस्मों का करें चयन
मानसून में हुए विलंब को देखते हुए इस साल किसानों को शीघ्र और मध्यम अवधि (125 से 130 दिन) में पकने वाली धान की किस्मों का चयन करने की सलाह दी गई है। इनमें एमटीयू 1010, एमटीयू 1153, एमटीयू 1156, एमटीयू 1001, विक्रम टीसीआर, छत्तीसगढ़ धान 1919, छत्तीसगढ़ तेजस्वी धान और महामाया प्रमुख हैं।
प्रति एकड़ बीज की मात्रा:
सीधी बुवाई व बियासी: 30 किलोग्राम प्रति एकड़।
रोपा पद्धति: 20 किलोग्राम प्रति एकड़।
हाइब्रिड प्रजाति: 6 किलोग्राम प्रति एकड़।
जलभराव वाले क्षेत्रों के लिए ‘लेही विधि’ वरदान
जिन खेतों में अधिक जलभराव हो गया है और बारिश थम नहीं रही है, वहां लेही पद्धति सबसे उपयुक्त है। इसके लिए 120-130 दिनों वाली किस्मों का चयन कर 40 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से बीज लें।
ऐसे तैयार करें अंकुरित बीज:
बीजों को 8-10 घंटे पानी में भिगोकर रखें, फिर पानी निथार लें। इसके बाद बीजों को पक्के फर्श पर रखकर गीले बोरे से 24-30 घंटे के लिए ढक दें। बीज अंकुरित होने पर बोरा हटाकर उन्हें छाया में सुखाएं। इसके बाद ड्रम सीडर से कतार में या छिटकवा विधि से बुवाई करें।
कवकनाशी और जैव उर्वरक से बीजोपचार आवश्यक
बुवाई से पहले प्रति किलो बीज को 2.5 ग्राम कार्बेन्डाजिम कवकनाशी से उपचारित करें। इसके बाद भूमि में पोषक तत्वों की पूर्ति के लिए तरल जैव उर्वरक (एजोस्पाइरिलम, पीएसबी और केएसबी) की 2-2 मिली मात्रा को 4 मिली पानी में मिलाकर (कुल 10 मिली घोल) प्रति किलोग्राम बीज को उपचारित करें। इससे पौधों को प्रति एकड़ 12 किग्रा नाइट्रोजन, 8 किग्रा फास्फोरस और 5 किग्रा पोटेशियम प्राप्त होगा।
खरपतवार नियंत्रण के लिए रासायनिक उपाय
फसल को खरपतवार से बचाने के लिए वैज्ञानिकों ने प्रभावी दवाओं के छिड़काव की सलाह दी है:
अंकुरण के 0 से 3 दिनों के भीतर: पेन्डीमेथीलीन (स्टाम्प, पेंडीगोल्ड आदि) की 1000 मिली मात्रा या पाइरेजोसल्फूरान (साथी, सेवक आदि) की 80 मिली मात्रा को 150 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव करें।
बुवाई या रोपाई के 20 से 25 दिनों बाद: बिसपायरी बेक सोडियम (नोमीनी गोल्ड आदि) की 100 मिली मात्रा या क्लोरीम्यूरान इथाइल + मेटसल्फ्यूरान मिथाइल (आलमिक्स आदि) की 8 मिली मात्रा को 150 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ छिड़काव करें।
