राजनांदगांव। जिले में बीते दो दिनों से हो रही निरंतर बारिश और वातावरण में बढ़ी नमी को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों के लिए विशेष अलर्ट और कृषि सलाह जारी की है। कृषि वैज्ञानिकों एवं अधिकारियों ने किसानों को धान, सोयाबीन, अरहर, उड़द, मूंग और कपास की फसलों में कीट एवं बीमारियों की नियमित निगरानी करने तथा आवश्यकतानुसार ही अनुशंसित दवाओं का छिड़काव करने की सलाह दी है।
विभाग का कहना है कि अत्यधिक नमी और आद्र्रता के कारण खेतों में फफूंदजनित रोगों के साथ-साथ कई तरह के हानिकारक कीटों का प्रकोप तेजी से बढ़ने की संभावना रहती है।
धान की फसल में भूरा माहू, तना छेदक और ब्लास्ट का खतरा
वर्तमान में धान की फसल 70 से 80 दिन की होकर दाना भरने की शुरुआती अवस्था में है। इस दौरान भूरा माहू, पैनिकल माइट, गंधी बग, तना छेदक, पत्ती लपेटक के साथ-साथ ब्लास्ट, भूरा धब्बा और शीथ ब्लाइट की कड़ी निगरानी जरूरी है।
भूरा माहू: पौधे के निचले हिस्से में छोटे भूरे कीट दिखने पर इमिडाक्लोप्रिड या डाइनोटेफ्यूरान का छिड़काव करें। खेत में अत्यधिक यूरिया का उपयोग न करें।
तना छेदक व पत्ती लपेटक: प्रोफेनोफॉस + साइपरमेथ्रिन अथवा क्लोरेंट्रानिलिप्रोल + लैम्ब्डा-साइहेलोथ्रिन का अनुशंसित मात्रा में प्रयोग करें।
ब्लास्ट व शीथ ब्लाइट: पत्तियों पर नाव के आकार के धब्बे दिखने पर ट्राइसाइक्लाजोल 75% WP तथा शीथ ब्लाइट में हेक्साकोनाजोल का छिड़काव करें।
सोयाबीन, कपास और दलहन में रखें ध्यान
सोयाबीन: फली बनने की अवस्था में तना मक्खी, गर्डल बीटल और सफेद मक्खी की निगरानी करें। पीला मोजेक से प्रभावित पौधों को उखाड़कर नष्ट करें और मैनकोजेब का प्रयोग करें।
कपास: गुलाबी सुंडी और सफेद मक्खी के लिए फेरोमोन ट्रैप लगाएं। प्रकोप की पुष्टि होने पर ही कीटनाशी का प्रयोग करें।
उड़द, मूंग व अरहर: फली छेदक व थ्रिप्स की रोकथाम के लिए खेत में ‘पक्षी बैठका’ और फेरोमोन ट्रैप लगाएं।
कृषि विभाग की मुख्य चेतावनियां व सुझाव
बारिश के दौरान छिड़काव न करें: बारिश रुकने और फसल की पत्तियां सूखने के बाद ही दवा का छिड़काव करें।
जल निकासी: खेतों में जलभराव न होने दें, पानी निकासी की तत्काल व्यवस्था करें।
मिश्रण से बचें: बिना कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अलग-अलग कीटनाशकों और फफूंदनाशकों को मिलाकर छिड़काव न करें।
जैविक उपाय: प्रारंभिक प्रकोप में नीम आधारित उत्पाद, ट्राइकोडर्मा विरिडी या बीटी (Bt) का उपयोग करें।
सुरक्षा: दवा छिड़कते समय मास्क, दस्ताने और सुरक्षात्मक कपड़ों का अनिवार्य रूप से प्रयोग करें।
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि किसी भी प्रकार के लक्षण दिखने पर तुरंत अपने क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी या कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क कर सही पहचान के बाद ही दवाइयों का उपयोग करें।
