राजनांदगांव। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत देश का पहला शत-प्रतिशत सौर गांव बनने का गौरव हासिल करने वाले राजनांदगांव जिले के ग्राम खैरा की सफलता का डंका चारों ओर बज रहा है। इसी क्रम में राजनांदगांव क्षेत्र के मुख्य अभियंता श्री हर्ष कुमार मेश्राम ने रविवार को खैरा गांव का दौरा कर इस अनूठी सौर क्रांति का बारीकी से अवलोकन किया।
इस दौरान उन्होंने गांव के सभी घरों की छतों पर स्थापित रूफटॉप सोलर सिस्टम का निरीक्षण किया और योजना के क्रियान्वयन, सौर ऊर्जा उत्पादन तथा ग्रामीणों को मिल रहे फायदों की जानकारी ली। इस अवसर पर उनके साथ अधीक्षण अभियंता श्री शंकेश्वर कंवर, ग्राम प्रमुख श्री कुंज लाल साहू सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और महिलाएं उपस्थित थीं।
ऊर्जा आत्मनिर्भरता की अनूठी मिसाल बना खैरा
प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और जनभागीदारी से ग्राम खैरा ने राष्ट्रीय स्तर पर एक नई मिसाल पेश की है। 889 की आबादी वाले इस गांव के सभी 141 घरों की छतों पर 2-2 किलोवाट क्षमता के रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए गए हैं, जिससे गांव में कुल 282 किलोवाट की सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता विकसित हो चुकी है। शत-प्रतिशत घरों को सौर ऊर्जा से जोड़ना ग्रामीण भारत में ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
मुख्य अभियंता श्री हर्ष कुमार मेश्राम ने इस व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि ग्राम खैरा ने स्वच्छ ऊर्जा और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में जो मुकाम हासिल किया है, वह प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि यह गांव इस बात का जीवंत उदाहरण है कि सरकारी योजनाओं के सटीक क्रियान्वयन और जनसहयोग से कैसे बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं।
बिना किसी आर्थिक भार के रोशन हुए घर, ‘सूर्य सखियों’ की रही अहम भूमिका
इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि ग्रामीणों को सोलर सिस्टम लगवाने के लिए अपनी जेब से एक भी रुपया खर्च नहीं करना पड़ा। केंद्र और राज्य सरकार की सब्सिडी के बाद बची हुई राशि की व्यवस्था कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के तहत की गई।
खास बात यह है कि सोलरयुक्त 141 घरों में से 93 घर प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के हितग्राहियों के हैं, जिससे जरूरतमंद परिवारों को सीधी राहत मिली है।
इस पूरे अभियान को सफल बनाने में स्थानीय महिलाओं और ‘पीएम सूर्य सखियों’ की भूमिका बेहद अहम रही। सूर्य सखियों ने घर-घर जाकर ग्रामीणों को जागरूक किया, आवेदन प्रक्रिया समझाई और दस्तावेज तैयार कराने में मदद की।
बिजली उपभोक्ता से ‘ऊर्जादाता’ बने ग्रामीण
रूफटॉप सोलर सिस्टम के जरिए अब खैरा गांव के लोग खुद अपने घरों में बिजली बना रहे हैं। नेट मीटरिंग की सुविधा के कारण घरों में इस्तेमाल होने के बाद जो अतिरिक्त बिजली बचती है, वह सीधे विद्युत ग्रिड में भेजी जाती है। इससे ग्रामीण अब केवल बिजली के उपभोक्ता नहीं, बल्कि ऊर्जादाता की भूमिका निभा रहे हैं।
ग्राम खैरा की यह सफलता प्रदेश और देश के अन्य गांवों के लिए एक अनुकरणीय मॉडल बन चुकी है, जो ग्रामीण भारत को स्वच्छ ऊर्जा और आत्मनिर्भरता का मजबूत संदेश दे रही है।
