निगम बजट केवल कागजी घोषणाओं और अधूरे वादों का ढेर : अभिमन्यु उदय मिश्रा

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राजनांदगांव। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया पैनलिस्ट अभिमन्यु उदय मिश्रा ने राजनांदगांव नगर निगम द्वारा प्रस्तुत 2026-27 के बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि यह पूरी तरह से जुमलों का पुलिंदा और जमीन से कटा हुआ दस्तावेज है। महापौर मधुसूदन यादव द्वारा 15 लाख रुपये के लाभ का बजट बताकर शहर की जनता को गुमराह करने का प्रयास किया गया है, पिछली बार लगभग 23 लाख घाटे का बजट था, जबकि हकीकत यह है कि यह बजट केवल कागजी घोषणाओं और अधूरे वादों का ढेर है।
अभिमन्यु मिश्रा ने कहा कि शहर की सबसे बड़ी समस्याएं पीने के पानी की किल्लत, जर्जर सड़कें, अव्यवस्थित सफाई और जलभराव आदि इन पर कोई ठोस और समयबद्ध योजना नजर नहीं आती। हर साल की तरह इस बार भी पाइप लाइन विस्तारश्, मिनरल वाटर प्लांट और नई टंकियों की घोषणाएं की गई हैं, लेकिन पिछले बजटों में किए गए ऐसे वादों का आज तक कोई हिसाब नहीं दिया गया।
उन्होंने सवाल उठाया कि शहर में पहले लगाए गए वॉटर एटीएम आज पूरी तरह बंद और खराब पड़े हैं, उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। जब पुराने प्रोजेक्ट्स को ठीक से चला नहीं पा रहे, तो अब नए मिनरल वाटर प्लांट का सपना दिखाना केवल जनता को भ्रमित करने की कोशिश है, उन्होंने यह भी कहा कि नगर निगम अब शहर विकास नहीं, इवेंट मैनेजमेंट में ज्यादा रुचि रखता है। क्रिकेट टर्फ, ई-वाहनों के चार्जिंग प्वाइंट जैसे दिखावटी प्रोजेक्ट्स जनता की मूल जरूरतों से ध्यान भटकाने का प्रयास हैं। जब आम नागरिक रोज पानी और बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहा है, तब ऐसे फैंसी प्रोजेक्ट पूरी तरह बेमानी हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि बजट में भ्रष्टाचार के नए रास्ते खोले गए हैं। चौक-चौराहों के सौंदर्यीकरण, बिल्डिंग प्लॉट और निर्माण कार्यों के नाम पर करोड़ों रुपये का प्रावधान किया गया है, लेकिन पारदर्शिता और जवाबदेही का कोई जिक्र नहीं है।
उन्होंने विशेष रूप से बूढ़ातालाब सौंदर्यीकरण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इस प्रोजेक्ट में जमकर भ्रष्टाचार हुआ, लेकिन आज तक कोई ठोस जांच या कार्रवाई नहीं हुई। इससे साफ है कि नगर निगम में जवाबदेही नाम की कोई चीज नहीं बची है और भ्रष्टाचार को संरक्षण दिया जा रहा है, उन्होंने कहा कि भाजपा शासित नगर निगम केवल घोषणाओं की राजनीति कर रहा है, जबकि जमीनी हकीकत में शहर बदहाल होता जा रहा है। निगम के पास न तो स्पष्ट रोडमैप है और न ही प्राथमिकताओं की समझ।
अंत में उन्होंने कुछ मांगे सामने रखते हुए कहा कि पिछले बजट की घोषणाओं का श्वेत पत्र जारी किया जाए, वॉटर एटीएम जैसे बंद पड़े प्रोजेक्ट्स को तत्काल चालू किया जाए। बूढ़ातालाब सौंदर्यीकरण घोटाले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए, हर योजना के लिए समय-सीमा और जवाबदेही तय की जाए, पेयजल, सड़क और सफाई जैसी मूलभूत समस्याओं को प्राथमिकता दी जाए, अन्यथा हम सड़कों पर उतरकर जनहित की लड़ाई लड़ेंगे और इस जनविरोधी बजट का पुरजोर विरोध करेंगे।