राजनांदगांव। केंद्र सरकार की दोषपूर्ण आर्थिक नीतियों और लचर आपूर्ति प्रबंधन के कारण आम जनता का मासिक बजट पूरी तरह से बिगड़ चुका है। बढ़ती कीमतों ने विशेषकर निम्न और मध्यम वर्गीय परिवारों का जीना दूभर कर दिया है। यह बात पूर्व एनएसयूआई महासचिव और कांग्रेस नेता सागर ताम्रकार ने एक बयान में कही। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आर्थिक मोर्चे और कानून-व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए।
ताम्रकार ने सरकारी और व्यापारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि देश की अर्थव्यवस्था पर महंगाई का भारी दबाव है, जिससे आम आदमी पिस रहा है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, खुदरा मुद्रास्फीति उछलकर 16 महीने के उच्चतम स्तर लगभग 3.93 प्रतिशत तक पहुंच गई है। थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई में भारी उछाल दर्ज किया गया है और यह 9.68 प्रतिशत के स्तर पर आ गई है, जो उत्पादकों और कारखानों की लागत में भारी वृद्धि को दर्शाती है। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बीच ईंधन व बिजली की थोक महंगाई 30 प्रतिशत से भी अधिक हो चुकी है, जिसका सीधा असर परिवहन और लॉजिस्टिक्स की लागत पर पड़ रहा है। खाद्य महंगाई लगातार ऊंचे स्तर (लगभग 4.78 प्रतिशत) पर बनी हुई है। हरी सब्जियों के दाम 48 प्रतिशत से अधिक बढ़ गए हैं, जबकि चांदी की कीमतों में 155 प्रतिशत और सोने में 40 प्रतिशत तक की भारी वृद्धि दर्ज की गई है।
कांग्रेस नेता ने केंद्र की विदेश और आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब भारत को रूस से सस्ता कच्चा तेल मिल रहा था, तो अमेरिका के दबाव में वेनेजुएला से तेल खरीदने की क्या जरूरत थी? उन्होंने आरोप लगाया कि तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के नाम पर लोगों को भ्रमित किया जा रहा है। आज मोदी सरकार में अमीर और अमीर होते जा रहे हैं, जबकि गरीबों को दो वक्त का खाना भी नसीब नहीं हो रहा है। पूंजीपति मित्रों के फायदे के लिए गरीबों का गला घोंटा जा रहा है।
राज्य सरकार को आड़े हाथों लेते हुए सागर ताम्रकार ने कहा कि छत्तीसगढ़ एक बिजली उत्पादक राज्य है, लेकिन मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के कार्यकाल में चार बार बिजली की दरों में वृद्धि की गई है। भीषण गर्मी के इस मौसम में भी जनता को निर्बाध बिजली नहीं मिल पा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए सुशासन तिहार का जश्न मना रही है, जो कि जनता के साथ क्रूर मजाक है।
बयान में आगे कहा गया कि छत्तीसगढ़ आज नशा और अपराध का गढ़ बन चुका है। किसान, जवान, आदिवासी और महिलाएं आत्महत्या करने को मजबूर हैं। बालोद में आदिवासियों और मीडियाकर्मियों के साथ हुई बर्बरता का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आदिवासी मुख्यमंत्री होने के बावजूद आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन पर कब्जा करने की मुहिम चलाई जा रही है। ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार केवल बड़े उद्योगपतियों के इशारे पर काम कर रही है।
ताम्रकार ने सरकार से जनता को तुरंत राहत देने के लिए निम्नलिखित कदम उठाने की मांग की है, जिसमें आम जनता को राहत देने के लिए पेट्रोल- डीजल और रसोई गैस पर भारी एक्साइज ड्यूटी और टैक्स तुरंत कम किए जाएं। खाद्य पदार्थों, विशेष रूप से हरी सब्जियों और दालों की जमाखोरी और मुनाफाखोरी करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो। आवश्यक उपभोक्ता वस्तुओं की वितरण प्रणाली को मजबूत किया जाए ताकि गरीब और मध्यम वर्ग को सस्ती दरों पर खाद्यान्न उपलब्ध हो सके।
महंगाई और बिजली की दरों से जनता बेहाल, आर्थिक नीतियां पूरी तरह विफल : सागर ताम्रकार
