राजनांदगांव। कृषि विज्ञान केंद्र सुरगी ने जिले के किसानों के लिए मौसम आधारित कृषि परामर्श जारी करते हुए खरीफ फसलों की बुवाई मौसम के अनुसार करने तथा उन्नत किस्मों के प्रमाणित बीजों का उपयोग करने की सलाह दी है। केंद्र ने कहा है कि आगामी दिनों में मध्यम बादल छाए रहने और हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। ऐसे में किसान धान सहित अन्य खरीफ फसलों की बुवाई शुरू कर सकते हैं तथा मौसम साफ रहने पर ही खरपतवारनाशी का छिड़काव करें।
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से धान, सोयाबीन, अरहर, मक्का एवं मूंग जैसी फसलों की उन्नत किस्मों के बीज पहले से उपलब्ध रखने की अपील की है। धान की कतार बोनी के लिए प्रति हेक्टेयर 50 किलोग्राम बीज का उपयोग करने तथा बीज की गहराई 3 से 4 सेंटीमीटर से अधिक नहीं रखने की सलाह दी गई है। बुवाई से पहले बीज शुद्धिकरण और जैव उर्वरकों से बीजोपचार करने पर भी जोर दिया गया है।
कृषि विज्ञान केंद्र ने बताया कि धान की कतार बोनी से फसल जल्दी पकती है और उत्पादन भी बेहतर मिलता है। रोपाई के लिए कुल क्षेत्रफल के लगभग दसवें हिस्से में नर्सरी तैयार करने की सलाह दी गई है। वहीं धान की बुवाई के शुरुआती दिनों में खरपतवार नियंत्रण के लिए अनुशंसित मात्रा में खरपतवारनाशी का उपयोग करने को कहा गया है।
सोयाबीन की खेती के लिए 45 सेंटीमीटर की कतार दूरी और 7 से 10 सेंटीमीटर पौध दूरी रखने, जबकि अरहर में 60 से 90 सेंटीमीटर कतार दूरी रखने की सलाह दी गई है। मक्का की बुवाई 60 से 75 सेंटीमीटर कतार दूरी तथा 20 से 25 सेंटीमीटर पौध दूरी पर करने की अनुशंसा की गई है। मूंगफली की फसल में भी बीजोपचार और संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाने पर विशेष जोर दिया गया है।
कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों से मौसम के पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हुए फसल प्रबंधन करने तथा वैज्ञानिक अनुशंसाओं का पालन कर उत्पादन बढ़ाने और लागत कम करने की अपील की है।
