राजनांदगांव। जिले के पशुधन विकास विभाग में लंबे समय से विवादों में घिरे रहे प्रभारी उप संचालक डॉ. अनूप चटर्जी को अंततः पद से हटाते हुए विकासखंड में पदस्थ कर दिया गया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार डॉ. अनूप चटर्जी पर विभागीय जांच भी संधारित है।
उनके हटने की खबर से विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों सहित गौ सेवा से जुड़े संगठनों में हर्ष का माहौल है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार डॉ. चटर्जी द्वारा पिछले 3 वर्षों से प्रभारी उप संचालक का कार्यभार संभाला जा रहा था। आरोप है कि इस दौरान उनके द्वारा विभागीय कार्यों का समुचित निर्वहन नहीं किया गया। तीन वर्षों में एक भी जिला स्तरीय विभागीय समीक्षा बैठक आयोजित नहीं की गई।
विभागीय सूत्रों के अनुसार कुछ चुनिंदा पशु चिकित्सकों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से उन्हें मुख्यालय में ही पदस्थ रखना, और भंडार जैसे अति-महत्वपूर्ण प्रभार को दूसरे जिले में पदस्थ एक पशु चिकित्सक को सौंपना जैसे निर्णयों से विभागीय कार्य प्रभावित हुआ। बताया जा रहा है कि उक्त पशु चिकित्सक का 5 माह से वेतन भी जारी नहीं हो सका है, जबकि जिला कार्यालय में स्वीकृत पद से अधिक पशु चिकित्सक पदस्थ हैं।
इस संबंध में विभागीय पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ एवं सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी संघ के द्वारा पूर्व में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से मिलकर प्रभारी उप संचालक को हटाने की मांग की गई थी।
वहीं गौ सेवकों का कहना है कि प्रभारी अधिकारी के उदासीन रवैये के कारण जिले में गौवंश के उपचार कार्य में लापरवाही बरती जा रही थी, जिसके चलते कई बार कार्यालय का घेराव भी किया गया। विगत सप्ताह ही जिला शहर कांग्रेस अध्यक्ष जीतू मुदलियार के नेतृत्व में घुमंतू पशुओं के संरक्षण एवं उपचार को लेकर कार्यालय का घेराव कर उचित कार्रवाई की मांग की गई थी।
प्रभारी उप संचालक के तबादले के बाद विभागीय कार्यों में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
