राजनांदगांव में किसानों ने उठाए 2843 मीट्रिक टन खाद, संतुलित उर्वरक उपयोग की बढ़ी प्रवृत्ति

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राजनांदगांव। जिले के किसानों ने इस वर्ष खरीफ फसलों के लिए समितियों के माध्यम से 2843 मीट्रिक टन खाद का सफलतापूर्वक उठाव किया है। उप संचालक कृषि श्री टीकम सिंह ठाकुर ने बताया कि धान, दलहन और तिलहन फसलों में परंपरागत खाद के साथ वैकल्पिक खाद, नैनो यूरिया और डीएपी के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2026-27 में 68690 मीट्रिक टन खाद का लक्ष्य रखा गया है।

जिले में सहकारी और निजी क्षेत्रों को मिलाकर 40670 मीट्रिक टन खाद उपलब्ध है, जिसमें 16190 मीट्रिक टन यूरिया, 4195 मीट्रिक टन डीएपी, 10242 मीट्रिक टन एनपीके, 3447 मीट्रिक टन एमओपी और 6596 मीट्रिक टन सिंगल सुपर फास्फेट शामिल हैं। यह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 82 प्रतिशत अधिक है।

उप संचालक कृषि ने बताया कि जिले के 8555 किसानों को खाद वितरण किया जा चुका है। इसमें 1174 मीट्रिक टन यूरिया, 324 मीट्रिक टन डीएपी, 715 मीट्रिक टन एनपीके, 211 मीट्रिक टन एमओपी और 419 मीट्रिक टन सिंगल सुपर फास्फेट शामिल हैं।

कृषि विभाग ने किसानों को मिश्रित उर्वरकों के उपयोग के लिए जागरूक किया है। एकड़ धान फसल में डीएपी के स्थान पर एनपीके खाद 12:32:16, 20:20:0:13, 16:16:16, 24:24:0 और 28:28:0 का उपयोग करने की सलाह दी जा रही है। इससे यूरिया की खपत कम होती है और पोषक तत्व संतुलित मात्रा में उपलब्ध होते हैं।

डोंगरगांव विकासखंड के किसान श्री मेहरूराम पटेल और श्री टुमेश साहू ने बताया कि इस बार उन्होंने यूरिया और एनपीके मिश्रित खाद का उठाव किया, जिससे धान में पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में मिल रहे हैं और बुवाई के समय भी खाद डालना आसान हो गया। सेवा सहकारी समिति घुपसाल के किसान श्री हेमलाल ने भी वैकल्पिक खाद 20:20:0:13 को प्राथमिकता दी, जिससे नत्रजन और फास्फोरस संतुलित मात्रा में प्राप्त हो रहे हैं।

उप संचालक कृषि श्री टीकम सिंह ठाकुर ने सभी समितियों और निजी उर्वरक विक्रेताओं से अपील की कि किसानों को खाद के उठाव में किसी भी प्रकार की समस्या न आए। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा अनुशंसित मात्रा के अनुसार पॉश मशीन के माध्यम से खाद का वितरण और जानकारी का संधारण सुनिश्चित किया जाए, ताकि अनावश्यक खाद की कालाबाजारी रोकी जा सके।